दिल्ली दंगों के मामले में क्यों गिरफ्तार हुए JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद?

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को बीते रविवार को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा गिफ्तार कर लिया गया। मामला उमर खालिद और दिल्ली मे हुए दंगों के दौरान उनके भड़काऊ भाषण को बताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने 11 घंटो की लंबी पूछताछ के बाद उमर को गिरफ्तार किया। खालिद कि पुछताछ 2 सितंबर को भी कुछ घंटो के लिए हुए थी, जिसमें पुलिस ने दंगे के पीछे की कथित साजिश के मामले में पुछताछ की थी और उमर का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया था।

आम आदमी पार्टी के गिरफ्तार नेता ताहिर हुसैन ने भी अपने कुबूलनामे में उमर खालिद का नाम लिया था  साथ हीं अन्य गिरफ्तार लोगों ने भी उमर की संलिप्तता की बात कही थी।

Delhi riots
दिल्ली दंगा /फोटो साभार :PTI
दिल्ली दंगा
दिल्ली दंगा /फोटो साभार :PTI
दिल्ली दंगा /फोटो साभार :PTI
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बता दें , यह दंगा नागरिकता कानून संशोधित बिल के समर्थक और विरोधियों के बीच 24 फ़रवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुआ था। जिसके बाद इस दंगे के कई पहलू सामने आए जिसका एक पहलू उमर खालिद का एक भाषण भी है जो कि खालिद ने महाराष्ट्र के अमरावती में CAA विरोध करते हुए दिया था, जिसके बाद लोगों ने इस भाषण को अलग अलग तरीके से देखते हुए उसे संशोधित नागरिकता कानून का विरोधी भाषण नहीं बल्कि देश विरोधी भाषण बताया। बाद में देश के गृहमंत्री ने भी इस भाषण का जिक्र करते हुए इसे देश विरोधी भाषण बताया।

कौन विरोध कर रहा खालिद के गिरफ्तारी पर? 

दिल्ली पुलिस ने जांच के संबंध में कहा कि पुलिस दंगे में शामिल सभी लोगों की भूमिका पर जांच कर रही है। कोर्ट ने उमर खालिद को 10 दिनों का पुलिस रिमांड दिया है। जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया गया और ट्विटर पर #standwithUmarKhalid का ट्रेंड भी चलाया गया। अभिनेता प्रकाश राज ने इसे शर्मनाक बताया तो वहीं प्रोफेसर अपूर्वानंद और समाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर जैसे 12 लोगों ने इस गिरफ्तारी का विरोध किया और उमर खालिद को देश का साहसी युवा बताया।

क्या है UAPA? 
इस कानून में, किसी भी तरह की व्यक्तिगत या सामूहिक गैरकानूनी गतिविधि जिससे देश की एकता या अखंडता को खतरा हो तो उसकी करवाई इस कानून के द्वारा होती है।
1967 में बने इस कानून को 2019 में संशोधित कर और भी सख्त कर दिया गया था।इस कानून के अंतर्गत मुजरिम को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती हैं।
इस कानून में भारतीय और विदेशी दोनों के ऊपर मुकदमा हो सकता हैं, इसमें अपराध की प्रवृति और लोकेशन से कोई फर्क नहीं पड़ता है। विदेश में किए गए अपराध के मामले में भी मुकदमा हो सकता है जैसा कि इस कानून मे प्रावधान है।
यह कानून एनआईए को अधिकार देता कि वह किसी भी आतंकी गतिविधियों में शामिल संदिग्ध को आतंकी घोषित कर सकता हैं।
UAPA के तहत बहुत बड़ी-बड़ी हस्तियां भी गिरफ्तार हो चुकी हैं।इस कानून के अनुसार अपराधी को 7 साल की सजा हो सकती है लेकिन अगर गैरकानूनी गतिविधियों में किसी की जान गई हो तो उम्रकैद और फांसी की भी सजा भी हो सकती है।

By, Ritu Kumari

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