नीतीश कुमार के राज में ध्वस्त हुआ बाहुबलियों का किला?

अपराधों की दुनिया में बिहार और उत्तर प्रदेश को याद किया जाता है। खास तौर पर यहां के राजनेताओं का अपराध में संलिप्त रहना चर्चा का विषय बना रहता है। शहाबुद्दीन से लेकर आनंद मोहन,अनंत सिंह, सुनील पांडे, मुन्ना शुक्ला, रामा सिंह, भूषण यादव, अखिलेश यादव, रीतलाल यादव, सूरज भान सिंह, पप्पू यादव, सतीश पांडे, राजन तिवारी और मनोरंजन सिंह धूमल जैसे बाहुबलियों से बिहार के तमाम जिलों में खौफ का साया बना रहता था। जातियों के समीकरण में यहां हर जाति के अपने अपराधी रहे हैं। जातियों के बीच सामाजिक हैसियत को लेकर लड़ाई उठती रही है और इनके बीच से दबंग नायक निकलते रहें हैं, जिनका एक ही मकसद रहा है – सरकारी ठेके पर अपना राज्य स्थापित करना, वे इसे सफल बनाने के लिए राजनीति का सहारा लेते थे। ऐसा कहा जा सकता है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन में इनका इनका दबदबा कम होता नज़र आ रहा है। करीब सैकड़ों अपराधिक मामलों में संलिप्त ये राजनेता नितीश कुमार के शासन काल में अपना आधिपत्य खोते नजर आ रहे हैं। नीतीश सरकार ने बिहार के इन सभी गैंगस्टर पर लगाम लगाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना कर इनकी आकांक्षाओं को समाप्त कर दिया है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट:

वर्ष 2000 से फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष प्रकार के मामलों को सीमित समय में निपटारा करना था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी प्रफेसर सैयद अली मोहम्मद खुसरो ने के नेतृत्व में 11वें वित्त आयोग ने देश के निचली अदालत में लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए 1734 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना के लिए एक सिफारिश की थी। मार्च 2019 के अंत तक देश में लगभग 1200 फास्ट ट्रैक कोर्ट कार्यरत हैं, जिनमें करीब 43.55 लाख मामले लंबित है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया था कि इनमें से 8 लाख केस एसे हैं जो 10 साल से ज्यादा से चल रहें हैं। आमतौर पर फास्ट ट्रैक अदालतों से 1 महीने में लगभग 12 से 15 मुकदमे निबटाने की उम्मीद की जाती है।

बिहार में फास्ट ट्रैक आदालत:

2006 में सभी लंबित मामलों के शीघ्र निपटारा करने को लेकर बिहार सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत की थी, जिसके स्थापित होते ही बहुत सारे अपराधिक केस का हल निकाला गया और कुछ केस आज भी लंबित पड़े हैं। यह सत्य है कि इस कोर्ट के गठन होते ही बिहार के बाहुबलियों पर अंकुश लग गया है। देश के कुल 1200 फास्ट ट्रैक अदालतों में 183 के साथ बिहार में सबसे अधिक फास्ट ट्रैक कोर्ट है। अभी भी इनमें 75 हजार से अधिक केस लंबित पड़े हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह भी कहा गया है कि फास्ट ट्रैक अदालतों द्वारा दोषी ठहराए गए लगभग 40% लोगों को बिहार उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी है।

राजनेताओं का आतंक:

जब हम बिहार की बात करते हैं तो नेताओं का नाम अपराधिक मामलों में सबसे पहले उठकर आता है। उत्तर बिहार से दक्षिण बिहार तक अपराधिक मामलों के अधिकतर सरगना राजनेता ही होते हैं। ऐसे ही कुछ नाम जिनके कारण बिहार की राजनीति आतंक के नाम से मशहूर थी।

Sahabuddin

 

  • शहाबुद्दीन

बिहार की राजनीति में बाहुबली शहाबुद्दीन का नाम सुनकर लोगों से एक ही प्रतिक्रिया मिलती थी। आतंक का दूसरा नाम है सहाबुद्दीन। 10 मई, 1967 को सिवान में जन्मा यह नेता अपने कामों से नहीं बल्कि अपराधिक घटनाओं को लेकर मशहूर था। लालू प्रसाद यादव की छत्रछाया में अपनी आतंकी फैक्ट्री चलाने वाला यह नेता सिवान का बादशाह बन बैठा था। तेजाब कांड में दो भाइयों की हत्या, गिरफ्तारी में पुलिस पर हमला, चंद्रशेखर हत्याकांड, 2007 में एक महिला से बलात्कार जैसे बहुत सारे मामले को अंजाम दे शहाबुद्दीन का अपराधिक राज, नितीश सरकार के आते ही समाप्त होने लगा। इस सरकार के आने के बाद शहाबुद्दीन को जेल भेज दिया गया और आज यह तिहाड़ जेल में अपनी सजा काट रहा है।

 

  • अनंत सिंह

कानून की किताब में शायद ही कोई ऐसी धारा बची हो जिसके तहत अनंत सिंह के नाम पर कोई केस दर्ज ना हो। इस पर करीब ढाई दर्जन से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। कत्ल, अपहरण, फिरौती, डकैती, बलात्कार जैसे तमाम आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त यह व्यक्ति बिहार के मोकामा से विधायक रह चुका है। मोकामा के डॉन की कहानी कुछ अलग ही चलती है। बिहार सरकार के नाम से मशहूर यह डॉन राजद से लेकर जेडीयू तक के सफर में अपनी आतंक का फैक्ट्री चलाता रहा है। अब उस भी मुक़दमा चलाए गए हैं और वह बेउर जेल में बंद है।

  •  आनंद मोहन

1990 में राजनीति में प्रवेश कर पहली बार विधायक बने आनंद मोहन की छवि कोसी के बाहुबली के रूप में चर्चित थी। गोपालगंज के जिलाधिकारी की निर्मम हत्या कर आनंद मोहन जेल चले गए और आज उम्र कैद की सजा काट रहे हैं।

  • कोसी क्षेत्र के रॉबिनहुड – पप्पू यादव 

अपनी दबंगई से खबरों में रहने वाले पप्पू यादव के खिलाफ 17 क्रिमिनल केस है। कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक अजित सरकार की हत्या करने के आरोप में अदालत ने उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई थी। फिर सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया।

Sunil pandey bihar

  • सुनील पांडे

बिहार के चर्चित आरा सिविल कोर्ट में बम ब्लास्ट के मामले में तरारी विधानसभा से जदयू विधायक सुनील पांडेय ‘लम्बू शर्मा’ की मदद करने के आरोप में जेल में बंद है। अहिंसा से पीएचडी कर चुके सुनिल ब्रह्मेश्वर मुखिया के हत्या मामले में भी आरोपी बनाए गए हैं।

Munna shukla bihar

  • मुन्ना शुक्ला

दबंग नेता और बाहुबली पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला उर्फ विजय कुमार शुक्ला कई आपराधिक मामलों का दोषी है। पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या मामले में अदालत ने इसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

  • रामा सिंह

लोजपा से अपनी राजनीतिक नीवं मजबूत कर मनहार से विधायक बनकर उभरे इस नेता पर हत्या, बलात्कार जैसे कई संगीन जुर्म दर्ज है।

Surajbhan singh

  • सूरज भान सिंह

रामविलास पासवान की पार्टी से सांसद रह चुके सुरजभान 30 से अधिक जघन्य अपराधों में लिप्त है। हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।

 

  • लालू के खास बाहुबली नेता – रीतलाल यादव

पटना आज भी किसी के नाम से कांप जाता है तो वह है बिहार का दूसरा जॉन रीतलाल यादव। इसकी भी अपराधिक छवि की शुरुआत 90 के दशक से हुई थी, जब बिहार में लालू की सरकार थी। रंगदारी और चलते चलते किसी की हत्या कर देना इसका मुख्य पेशा था। सत्यनारायण सिंह हत्याकांड, दो रेलवे ठेकेदार की हत्या, दानापुर रेलवे पर कब्जा जमाने वाला यह डॉन आज सलाखों के पीछे बंद है।

Ritlal yadav hd pic

ऐसे और भी बाहुबली है जिनका सितारा या तो अस्त हो गया है या फिर धीमा पड़ गया है। नीतीश सरकार के आने के बाद और फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना से तमाम अपराधिक गतिविधियां रखने वाले नेताओं का सफाया होने लगा है। इस बात का समर्थन करते हुए भी पार्टियां यह मानती है की अपराधिक मामलों पर अंकुश लगाने में नितीश सरकार खरा उतरी है।

Written by: Abhay Kumar Singh

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