सेक्स के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए इस भारतीय महिला उद्यमी ने ऐसे कदम उठाए

शकुन सेठी जिन्होंने टिकल डॉट लाइफ नाम के प्लेटफॉर्म की स्थापना की है उनका कहना है कि भारत में लोगों को सेक्स के बारे में खुल कर बात करनी चाहिए।

बता दें कि टिकल डॉट लाइफ एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां सेक्स से जुड़ी जानकारियां दी जाती हैं एवम् सेक्स से जुड़े उत्पाद बेचे जाते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर अबतक 1000 से ज्यादा सेक्स से जुड़े पॉडकास्ट तथा विडियो उपलब्ध हैं जिससे लोग अपनी यौन से जुड़ी जरूरतों और जानकारियों का पता लगा पाएं।इस टीम में क़रीब 350 लोग काम करते हैं जिनकी उम्र 21 से 76 साल के बीच है।

एक छोटे से शहर जम्मू में बड़े होने के दौरान उनकी सोच थी कि यौवन,कामुकता तथा यौन प्रजनन का मज़ाक बनाना इस समाज में स्वीकार्य है।लेकिन कुछ समय बाद हीं उनकी यह सोच बदल गई।

उन्होंने मीडिया में बताया कि जब वे नीदरलैंड्स से अपने मास्टर्स कोर्स को कर रहीं थीं तो वहां उनके छात्रावास के निकट ही एक सेक्स टॉय की दुकान स्थित थी।उन्हें इस दुकान में जाने के लिए झिझक के कारण 6 महीने लग गए।उन्हें डर था  क्योंंकि सेक्स खिलौने वैध नहीं माने जाते एवम् उनसे जुड़ी किसी भी तरह की बातचीत करने पर लोगों द्वारा चरित्र पर ऊंगली उठाई जाती है।लेकिन जब वे सेक्स खिलौने की उस दुकान पर पहुंचे तो उन्होंने दुकानदार से झूठ बोला था कि वे अपनी चाची के लिए कोई खिलौना लेने आई हैं।लेकिन उन्होंने कभी सेक्स से जुड़ी बातें अपने परिवार के साथ नहीं की थी।उस सेक्स टॉय के दुकानदार ने उनसे पूछा था कि उनकी चाची को कौन से खिलौने पसंद आएंगे? इस दुकान की यात्रा के बाद वे यूरोप के ऐसे ही 100 से ज्यादा दुकानों में गए एवम् सभी जगह उन्होंने एक ही बहाना दिया कि वे वहां अपनी चाची के लिए कुछ खरीदना है और सभी दुकानदारों ने उनसे यही पूछा की उन्हें क्या पसंद आएगा? उनके द्वारा सेक्स खिलौने से जुड़े इतने सहज सवाल ने सेक्स के प्रति उनके नजरिए को पूरी तरह बदल दिया।

उन्होंने बताया कि भारत के कानून एवम् चिकित्सा के पाठ्यक्रम में सेक्स एवं प्रजनन की शिक्षा के लिए कोई खास श्रेणी नहीं है।उन्हें विश्वास नहीं हुआ ये जानकर कि भारत में सेक्सोलॉजिस्ट बनने के लिए मेडिकल में कोई अलग से पाठ्यक्रम नहीं है एवम् जो खुद को इस क्षेत्र के एक्स्पर्ट मानते हैं वे तो किसी और क्षेत्र के जानकार हैं।उन्होंने कहा कि भारत में लोग यौन से जुड़ी समस्याओं को लेकर स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाते हैं और वे भी सहज रूप से सवाल पूछने में असमर्थ हैं।यहां तक कि लोग भी ये स्वीकार करने में झिझक महसूस करते हैं  और उन्हें इस विषय में शिक्षित होने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि उनके इस स्टार्टअप का मकसद लोगों के बीच कलंक के तौर पर माने जानेवाली सेक्स से जुड़ी गलत धारणाओं को गलत साबित करना।उन्होंने कहा कि 2024 तक यह इंडस्ट्री करीब 39 बिलियन डॉलर तक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 2018 ग्लोबल वेलनेस सम्मिट की रिपोर्ट के अनुसार अब सेक्स से जुड़ी धारणाएं बदल रही हैं।जिससे इस क्षेत्र में परिवर्तन आ रहा है।भारत में LGBTQ समुदाय के बारे में कई गलतफहमी एवम् गलत धारणाएं हैं।उन्होंने कहा कि इस उद्योग का लक्ष्य यही है कि जिसे जो पसंद है उसे वो मिल जाए और वो भी आसानी से।

उन्होंने बताया कि ‘sex’ जैसे  शब्द के उपयोग करने के कारण उन्हें कोई विज्ञापन संस्थाएं  विज्ञापन नहीं देती जिसके कारण इस उद्योग को लोगों तक पहुंचाना काफी कठिन रहा है।

दी ग्रे इंडिया से की गई बातचीत के दौरान उन्होंने यौन जागरूकता के बारे में बताते हुए कहा कि उनका प्लेटफॉर्म 18 साल एवं इससे उपर के लोगों के लिए है जो इस बारे में खुले विचार के हों इस बारे में बात कर सकें और अन्य लोगों से भी इससे जुड़ी बातें कर उन्हें जागरूक कर सकें। इस विषय के खिलाफ जो जजमेंट तैयार किया गया है वे उससे लड़ सकें और लोगों में जागरूकता फैला सकें।

  • सेक्स क्यों टैबू है? 

उन्होंने इस विषय के बारे में बताया कि हम कोई भी चीज मान लेते हैं जबकि हमारे पास उसकी कोई जानकारी नहीं होती और फिर हम उस विषय के उपर बात नहीं करना चाहते और विषय को टैबू बना देते हैं।

  • कैसे हुई शुरुआत?

उन्होंने इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत करने पर कहा कि वे ऐसे लोगों से बात कर रहे हैं जो इस विषय पर काम करना चाहते हैं।उन्होंने बताया कि उनके प्लेटफॉर्म पर ज्यादा नॉर्थ अमेरिका के लोग उपभोक्ता के रूप में हैं।उन्होंने बताया कि भारत में भी अब बदलाव आ रहा है लोग इस विषय पर खुल के बात करना चाहते हैं।वे भी स्वीकार कर रहे हैं और उन्हें सबसे ज्यादा सवाल भारत से ही आते हैं जबकि उन्होंने भारत पर आधारित कंटेंट शेयर करना शुरू नहीं किया है।

उन्होंने अपनी संस्था के बारे में बताते हुए कहा कि अभी इस संस्था में 8 सदस्यों की टीम काम करती है जबकि पूरी दुनिया से बहुत से लोग वॉलंटियर करते हैं।उन्होंने बताया कि इसमें विशेषज्ञ काम करते हैं इसकी वजह उनके द्वारा व्यापक विषय का चुनाव करना है जिससे हर एज ग्रुप के लिए अलग विशेषज्ञों की जरूरत होती है।

  • सॉफ्ट पोर्न और जागरुकता में अन्तर कैसे?

उन्होंने इस संस्था के कार्य करने के तरीके को बताते हुए कहा कि वे इसमें किसी भी विषय को चुनते समय एक कंज्यूमर की तरह सोचते हैं।जो लोग उन्हें वे कंटेंट साझा करते हैं वे उनसे पूछते हैं कि क्या वो कंटेंट उन्हें समझ आएगा या वे अपने परिवार के साथ इसे साझा कर सकते हैं।इसी तरह वे किसी कंटेंट का चुनाव करते हैं।उन्होंने बताया कि उन्होंने कई पॉर्न प्रोडक्शन हाउसेज के साथ भी काम किया है जो दुनिया में काफी प्रसिद्ध हैं लेकिन वे भी सेक्स वेलनेस इंडस्ट्री में काम करना चाहते हैं।

  • कोई अपने परिवार में जागरुकता कैसे लाए?

उन्होंने परिवार में यौन से जुड़ी जागरूकता फैलाने के सवाल पर कहा कि हमें परिवार को जागरूक करने के लिए छोटे – छोटे कदम उठाने कदम उठाने होंगे उनसे इस बारे में बात करनी होगी जिससे वे धीरे धीरे स्वीकार करने लगेंगे।

सेक्स से जुड़े मिथको को ध्वस्त करने के लिए समाज में ऐसे सकारात्मक बदलाव ज़रूरी है और ये तभी सम्भव है जब आम जन मानस आगे बढ़े और लोगों को जागरूक करें।

Interview by, Shubham Kumar

Written by, Pratiksha Kumari

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