महिलाओं का टैटू बनवाना भी एक टैबू है। क्या है इसका इतिहास?

Tattooing of women is also a taboo.

टैटू बनवाना आज कल बहुत ही आम बात है। यह अपने बॉडी को एक आर्ट से डेकोरेट करने का एक ज़रिया है। लोग अपने लाइफ में किसी घटना को लेकर ,या किसी बहुत ही महत्वपूर्ण इंसान को लेकर या किसी अन्य वजहों के कारण टैटू बनवाते हैं। और इन टैटू का उनके ज़िन्दगी में एक अलग ही मतलब होता है। बहुत से लोगों के लिए यह एक फैशन स्टेटमेंट भी है। पर समाज के कई लोग इन्हें किसी दुसरे हीं नज़र से देखतें हैं, और अपने पूर्वाग्रहों के कारण उनके बारे में एक अलग राय बना लेते हैं।

Deepika Padukone at the 70th annual Cannes Film Festival at Palais des Festivals on May 18, 2017, in Cannes, France. Image – Andreas Rentz/Getty Images

टैटू बनवाने वालों को अपने ज़िन्दगी में बहुत से लोगों की कड़वी बातें तो सुननी पड़ती हीं है ,साथ ही बहुत सारी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
टैटू बनवाने से सबसे बड़ी परेशानी लड़कियों को आती है। 22 – 25 वर्ष की आयु के बाद, जो आम तौर पर भारत में ल़डकियों की शादी की उम्र है ; अगर इस उम्र में उन्होंने कुछ भी किया तो वो सीधे उन की होने वाली शादी या कहें कि “ज़िन्दगी” पर असर करती है। अक्सर भारत में माध्यम वर्ग में टैटू बनवाने वाली युवतियों को यह सुनना पड़ता है कि – “अब तुझसे शादी कौन करेगा, बनवाना ही था तो शादी के बाद पति के इच्छा से बनवा लेती|”
ये देखा गया है कि टैटू लोगों के करियर पर भी सीधा असर डालता है, अगर किसी के शरीर पर कोई टैटू है तो उन्हें नौकरी मिलने में दिक्कतों का सामना करना पर सकता है। कई कंपनी ये पहले ही साफ कर देती है के अगर शरीर पर टैटू है तो आप को जॉब नहीं मिल सकती।
टैटू से आसानी से लोग दूसरों को आंक लेते है। औरतों के शरीर पर टैटू होने से उन्हें चरित्रहीन समझा जाता है। खास बात यह है कि टैटू कहाँ बना है यह ‘चरित्रहीनता’ का पैमाना डिसाइड करता है। आज अगर कोई युवती टैटू बनवाने का सोंचे रही हो तो वह बहुत आसानी से अपने आप को जज करवा सकती है।

टैटू एक पुराना आर्ट है:

टैटू करवाना हजारों साल पुराना एक एक लोक कला है। अलग- अलग जगहों पर इसके अलग मतलब है।

Godna tattoo
Godna Tattoo

पुराने समय में टैटू को गुदना या गोदना कहा जाता था। और इसे ज़ेवर की तरह दर्शाया जाता था। ऐसा ज़ेवर जिसे औरतों से कभी कोई छीन नहीं सकता था। भारत के अलग- अलग राज्यों में टैटू की अपनी एक परम्परा है।जैसे-

  • असम और अरुणाचल प्रदेश के सिंघ्पो डिस्ट्रिक्ट में हर जेंडर के लिय अलग टैटू के नियम हैं। जहाँ शादी-शुदा औरतें अपने दोनों पैरों में टैटू करवाती हैं, वहीँ पुरुष अपने हाथों में टैटू करवाते हैं।
  •  दक्षिणी भारत में स्थायी टैटू को पचाकुथारात्हू कहा जाता है जो की 1980 से पहले वहां के लिए बहुत आम था।

लोग टैटू क्यों बनवाते हैं:

1.स्टूडेंट्स इसलिए टैटू बनवाते हैं ताकि वो ये दिखा सके के वो अब बड़े हो चुके हैं | हालांकि यह एक धारणा मात्र है।
2. कई लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों के टैटू को देख कर प्रेरित होते हैं और उन्हें वो टैटू पसंद आ जाती है, तो वो भी उस टैटू को अपने शरीर पर बनवा लेते हैं।
3. कई लोगों के ज़िन्दगी में कोई घटना हुई होती है या उन के ज़िन्दगी में कोई बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, तो उनको हमेशा याद रखने क लिए भी लोग टैटू बनवाते हैं।

5. किसी को अपने लाइफ में कुछ अलग करना होता है या उन्हें कुछ बदलाव चाहिए होता है, तो वो टैटू बनवा लेते हैं।

टैटू के अलग अलग मतलब हैं पर इसे किसी के ‘चरित्र’ से जोड़ना स्पष्ट मूर्खता है। भारतीय संस्कृति में जहां टैटू का अपना एक इतिहास रहा है वहाँ स्त्रियों के टैटू बनवाने पर उनके चरित्र पर सवाल करना कितना जायज है?

By, Farhat Naz

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