25 हज़ार से ज़्यादा लाशों को दफ़ना चुके मो. शरीफ की कहानी, जिन्हें राम मंदिर भूमिपूजन का न्योता भी गया था

वो कहते हैं कि उम्र ढलने के साथ व्यक्ति का जीवन भी स्थिर हो जाता है। इसके विपरीत, शरीफ चाचा ने साबित कर दिया कि जब तक शरीर के अंदर आशा और ज़ज्बा है तब तक व्यक्ति का शरीर नहीं ढलता। अपने बेटे की मृत्यु के बाद खुद को संभाला और साइकिल दुकान छोड़ लावारिस लाशों को अपना कर दफनाना शुरू कर दिया।

83 साल के मोहम्मद शरीफ कहते हैं “जब तक मैं और कुछ नहीं तोड़ पाता तब तक मैं टूट चुका था, इसलिए मैंने टुकड़ों को उठाया।”

शरीफ चाचा के नाम से मशहूर फैजाबाद निवासी का जीवन कठिनाईयों से भरा है। पिछले 27 वर्षों से मोहम्मद शरीफ 25000 लावारिस लाशों को दफना चुके हैं और कहते हैं कि वे जब तक जिएंगे तब तक लावारिस लाशों को अपना समझकर दफनाते रहेंगे।

पदम श्री से सम्मानित किया गया:

बता दें कि इनकी हालत आज भी दयनीय है। शरीर पर फटे कपड़े पहने फैजाबाद के कब्रिस्तान के एक कमरे में रहते हैं। दिलचस्प बात यह है कि लावारिस लाशों को अपनाने वाले शरीफ चाचा को इसी कारण इसी वर्ष भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।

Padmashree to Sharif chacha pic
पद्मश्री से सम्मानित होते हुए

इनके बेटे रईस खान काम को लेकर सुल्तानपुर गए थे। उस वक्त शरीफ खान साइकिल दुकान चलाया करते थे। काफी दिन तक बेटे का खबर ना मिल पाने के कारण यह काफी चिंतित थे। इन्होंने बेटे की तलाश में शहर जाना उचित समझा पर वहां भी कुछ पता ना चल सका। एक दिन ट्रैक पर बोरी में बंद रईस खान की लाश मिली, जिसे जानवरों ने खा लिया था। उस समय शरीफ चाचा बेटे की लाश देखकर पागल जैसे हो गए थे, पर खुद को संभाला और यह निश्चय किया कि अब से लावारिस लाश को अपना कर दफनाना शुरू करेंगे। उसके बाद से मोहम्मद शरीफ हिंदू-मुस्लिम सहित 25 हजार लाशों को दफना चुके हैं।

Ram mandir bhumi pujan invitation to Sharif chacha
राममंदिर भूमिपूजन का निमंत्रण पत्र दिखाते हुए शरीफ चाचा

बता दे कि वृद्धावस्था में भी एक नियमित दिनचर्या बनाने वाले और पदम श्री से सम्मानित शरीफ खान को राम मंदिर के शिलान्यास में 5 अगस्त को निमंत्रण भेजा गया था।

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