यूपी अब सरकार 5 साल तक काम परखेगी- फिर मिलेगी सरकारी नौकरी, जाने क्या हैं जॉब के नए नियम

आज के इस दौर में अच्छी नौकरी मिलना जो कि  ‘सरकारी नौकरी’ को समझा जाता है, अमूमन अधिकांश लोगों का सपना होता है। लेकिन हम जानते हैं कि आज सरकारी नौकरी पाना इतना आसान नहीं है। कुछ लोग खुद को बेरोजगार इसलिए भी कहते हैं क्योंकि उनके पास सरकारी नौकरी नहीं होती और सभी सरकारी नौकरी पाना इसलिए भी चाहते हैं क्योंकि उनसे उनका परिवार और उनका जीवन सुरक्षित होता है, लेकिन आज वही सरकारी नौकरी भी दांव पर लग गई है । सरकारी नौकरी की चाहत रखने वालों के लिए अब रास्ता और भी मुश्किल भरा हो गया है। सरकारी नियमों में बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। इसका एक दूसरा दृष्टिकोण भी है। सरकारी कंपनियों को प्राइवेट कंपनियों के हाथों में सौंपा जा रहा और इस करोना काल के बीच तमाम तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रहीं हैं। कोरोना महामारी में जहां अर्थव्यवस्था ढीली ढाली पर गई है तो इसका बुरा असर सरकारी नौकरियों पर भी पड़ा है जो बेरोजगारी बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार है। सरकारी नौकरी मिलना अब इतना आसान नहीं होगा लोगों के लिए क्योंकि इसमें नए नियम होंगे और यह नियम सरकारी नौकरी की चाह रखने वालों की नींद उड़ा दी है।

उत्तरप्रदेश में क्या बदलाव होंगे?

यूपी के योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी नौकरी भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों जैसे समूह “ख” और समूह “ग” में बड़ा बदलाव लाने के बारे में विचार विमर्श कर रही है।अगर प्रस्तावित नीति लागू होती है तो प्रदेश सरकार कुछ ऐसे प्रावधानों के साथ नियुक्ति करेगी कि समूह “ख” और समूह “ग” की नौकरियों में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को शुरुआत में पहले 5 वर्ष तक संविदा पर नियुक्ति होगी यानी नौकरी के शुरूआती 5 वर्ष तक अभ्यार्थी नियमित नहीं होंगे इस दौरान उन्हें सेवा संबंधी वे सारे लाभ नहीं मिलेंगे जो एक परमानेंट गवर्नमेंट एंप्लॉय को मिलते हैं। इन 5 वर्षों के दौरान संविदा कर्मीको के काम करने का लेखा-जोखा रखा जाएगा और साथ ही 6 महीने पर उनका मूल्यांकन भी किया जाएगा यानी कि 5 साल के पीरियड में सही तरीके से काम करने वालों को ही बाद में नियमित किया जाएगा जो लोग 5 साल की संविदा पूरी कर लेंगे और उनका कार्य संतोषजनक रहेगा तो उनकी सरकारी नौकरी पक्की हो जाएगी। इसके पीछे का तर्क यह है कि इस व्यवस्था में कर्मचारियों की दक्षता बढ़ेगी। साथ ही नैतिकता देशभक्ति के मूल्यों का विकास होगा। इतना ही नहीं सरकार के वेतन का खर्च भी कम होगा। यदि नई प्रस्तावित व्यवस्था लागू होता है तो इसके तहत नई व्यवस्था में इस फार्मूले पर अभ्यर्थियों को प्रतिवर्ष 60% अंक आने पर ही कार्यरत रहेंगे।अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सरकारी नौकरी के संबंध में नई व्यवस्था बेहद प्रारंभिक अवस्था में है हालांकि इस बारे में एक प्रस्ताव जल्द ही क्रमिक विभाग कैबिनेट के समक्ष विचार के लिए लाने की तैयारी कर रहा और सभी विभागों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। सभी विभाग के सुझाव लेने के बाद ही इसे कैबिनेट में लाया जा सकता है।

By, Kalyani Singh

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