भारतीय जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं,जानवरों सी हालत

भारत एक बड़ी जनसंख्या वाला देश है जहां अपराधियों की संख्या भी लाखों में है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 4.72 लाख कैदी हैं जिनमे 4.53 लाख पुरुष और 19 हजार 81 महिलाएं हैं।
भारत के कई जेलों में कैदियों को सुधारने और उनके मानसिक स्थिति को बेहतर करने की कोशिश की जाती है। यहां जेलों को कई स्तर पर रखा गया है, जैसे सेंट्रल जेल, जिला जेल और कई स्थानिय स्तर पर भी हैं ।

क्षमता से ज़्यादा क़ैदी हैं जेलों में, जानवरों सी स्थिति :
बात करें क्षमता की तो दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी तिहाड़ जेल, जिसकी क्षमता तो 10 हजार कैदियों की हैं, परंतु इसमें 18 हजार के करीब कैदियों को रखा गया है। महाराष्ट्र के पुणे स्थित यरवड़ा जेल की क्षमता 2449 कैदी की है पर यहां पे क़रीब 6000 कैदियों को रखा गया है। उत्तरप्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबद) के नैनी जेल की क्षमता 2090 कैदी की है लेकिन यहां लगभग 3693 कैदी रखे गए हैं। महाराष्ट्र के ठाणे स्थित सेंट्रल जेल की क्षमता 1,105 कैदियों की हैं लेकिन वास्तव में यहां करीब 3850 कैदी हैं। कोरोना महामारी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अपराधियों को रिहा करने का आदेश दिया ताकि इस महामारी में जेल का संतुलन बन सके। कई जेलों के कर्मचारियों और कैदियों में कोरोना संक्रमण पाए गए। सबसे ज्यादा उत्तरप्रदेश में 1 लाख कैदी हैं। बिहार में भी 39 हजार 814 कैदी हैं।

महिला जेल और कैदी:

देश में कुल 19 हजार 81 महिला अपराधी हैं और कुल 31 महिला यानी वुमन जेल हैं, जिसमें राजस्थान में सबसे अधिक 7 महिला जेल हैं। हालांकि देश में महिला अपराध भी दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है और जेलों की संख्या और व्यवस्था ज्यों की त्यों हैं। कई जगहों पर महिला जेल कर्मचारी भी नहीं है। तमिनाडु (5 महिला जेल) और राजस्थान के कई जेल खाली पड़े हैं वहीं उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में गैर- महिला जेल में महिला कैदियों की संख्या क्षमता से ज्यादा हैं।

By, Ritu Kumari

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