हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं बल्कि मोहब्बत है, और इसलिए मनाया जाता है हिन्दी दिवस : opinion

” मूरीद है जमाना जिसका वो जुनूँ क्या है,           अलंकार से रस भर दे वो हिंदी के आगे तु क्या है ”

हिंदी और हिंदुस्तान का रिश्ता इश़्क और मोहब्बत के दरक से होकर गुजरता है। यह एक भाषा ही नहीं बल्कि आज लोगों के दिलो-दिमाग में चाह और हकीकत के रूप में भरा हुआ है। भले हीं सदी और साल गुजर जाएं, लोग आएं या चले जाएं, लाखों वर्षों बाद भी हिंदुस्तान की मिट्टी में हिंदी का रस गंगा के निर्मल पानी जैसे बहता रहेगा। आज भी साहित्य की दुनिया में रस और छंद का प्यार बना हिंदी अपने अलंकार से पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित किए हुए है। एक भाषा के रूप में हिंदी हिंदुस्तान की धरती पर लोगों के लिए एक माँ के रूप में आकर्षित है। जब हवाओं में हिंदी का रस घुलता है, जब कविता और ग़ज़ल बन हिंदी गलियों में घूमती है, जब हिंदी में गाया हुआ ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’ हमारे कानों में पड़ता है तब लगता है मोहब्बत स्वयं गुनगुना रहा है।

सिन्धु से निकली है हिन्दी:

हिंदी और इसकी परिभाषा सचमुच अद्भुत है। यह भाषा इतिहास के पन्नों में आज भी चिराग बनकर मसाल पेश करती है। सिंधु के तट से उद्गम होकर आज गंगा के लहरों सहित नर्मदा, गोदावरी और कृष्णा के पवित्र धाराओं में अमर है। यह शब्द धर्म के गठजोड़ का अद्भुत उदाहरण है। आपने सुना होगा कि कई आक्रांता जो हिंदुस्तान की सरजमीं पर आए उन्हीं में ईरान और अरब देशों से आने वाले आक्रांताओं ने सिंधु नदी के दक्षिण में बसे लोगों को हिंदू कहा था और हिंदुओं के बीच बोली जाने वाली भाषा हिंदी कहलाई थी। यह हिंदी शब्द फारसी का हिस्सा है जो आज हिंदुस्तान में लोगों की पहली पसंद है।

पहली पसन्द है हिन्दी:

सैकड़ों वर्ष बाद आज लोकतांत्रिक भारत में लोगों की पहली पसंद हिंदी है। लोग हिंदी और उसके कृत्यों से खूब लगाव रखते हैं। उत्तर भारत के राज्यों में हिंदी को खूब सराहा जाता है, तभी तो दुनिया के सबसे प्रसिद्ध हिंदी कवि बनारस और इलाहाबाद के गलियों से निकले हैं।

हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं? 

भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। जिसे सम्मान के साथ 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी भाषी जगहों पर धूमधाम से कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इस दिन को मनाने का सिलसिला आजादी के बाद 1949 में 14 सितंबर से शुरू हुआ था।

राष्ट्रभाषा नहीं बल्कि राजभाषा है हिंदी:

भक्ति से लेकर वीर और प्रेम का रस घोलने वाली हिंदी भारत की राजभाषा है। जिसे 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा राजभाषा का दर्जा दिया गया था। राजभाषा यानी राष्ट्र के अमूमन राज्यों की पहली पसंद हिंदी है।

हिंदी की गरिमा आज पूरी दुनिया में अंग्रेजी के साथ मोहब्बत का अलग आयाम पेश करती है। मोहब्बत बन के लोगों के दिलों पर राज करती है।

नोट :यह लेख लेखक के अपने विचार हैं। 

By, Abhay Kumar Singh 

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