बिहार के DGP गुप्तेश्वर पांडेय की नेतागीरी! जानिए कैसे बने ‘क्राइम कंट्रोलर’

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का हाल हीं में एक वीडियो ट्वीटर पर तेजी से वायरल हुआ था। यह वीडियो अपने गुर्गों के साथ मिलकर कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले कुख्यात अपराधी विकास दूबे  के मारे जाने के पहले का है।
इस वीडियो में गुप्तेश्वर पांडेय विकास दुबे को चैलेंज करते और ये कहते हुए दिख रहे हैं कि विकास दुबे की हिम्मत है तो बिहार में घुंसकर दिखाएं तब बताएंगे की पुलिस शेर जैसे शिकार कैसे करती है ।
गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि लोग अपनी जाति के नाम पर वैसे अपराधियों की जयजयकार करते हैं, जिन्होंने बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध किए हैं। लोग अपनी जाति के नाम पर उन अपराधियों को नमाज़ अदा कर रहे हैं और उनके नाम का जाप कर रहे हैं । और उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि लोग ऐसे ही अपराध की संस्कृति को समाप्त करेंगे क्या?

इन्टरनेट पर अक्सर लोग उन्हें एक नेता बता उनपर तंज कसते हैं, न कि एक पुलिस ऑफिसर के तौर पर टिप्पणी की जाती है। अक्सर लोग कहते हैं कि गुप्तेश्वर पांडेय अपनी भाषणबाजी के लिए भी जाने जाते हैं पर एक तबका यह भी कहता कि वो ऐसा अपने आप को मीडिया की नज़रों में लाने के लिए करते हैं। गुप्तेश्वर पांडेय इस बारे में कहते हैं कि लोग तो कुछ भी कहते हैं यदि आज महात्मा गांधी, भगवान राम और कृष्ण होते तो लोग उन पर भी सवाल उठाते। 
दिसंबर 2019 में वायरल हुए एक अन्य वीडियो में  डीजीपी ने उन लोगों को लताड़ा था जो अपनी जाति या धर्म के नाम पर अपराधियों का समर्थन करते हैं। उनका स्वागत फूल मालाओं से करते हैं और अपराध के लिए पुलिस को दोषी ठहराते हैं।
ऐसा नहीं है कि बिहार के डीजीपी पहली बार चर्चा में आए हों। मार्च 2009 में उन्होंने पुलिस सेवा से रिटायरमेंट ली थी जिसके ठीक 9 महीने के बाद पुलिस सेवा में पुनः सम्मिलित होकर उन्होंने सबको चौंका दिया था। बिहार में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी रिटायरमेंट ले चुके पुलिस कर्मी को वापस बहाल कर लिया गया हो।

Gupteshwar Pandey hd pic with nitish kumar
Image from the wall of Gupteshwar Pandey.

खबरों की माने तो उस समय गुप्तेश्वर पांडेय ने रिटायरमेंट चुनाव लड़ने के लिए लिया था । लेकिन कुछ कारणों से वे चुनाव नहीं लड़ पाए ।

  • कैसे बने बिहार के DGP:
    बक्सर में जन्में गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।फरवरी 2019 में गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के डीजीपी बनाए गए। यहां भी उनके डीजीपी बनने की खबर ने सबको चौंका दिया था।बता दें कि उस समय सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के तहत बिहार सरकार ने डिजीपी पद पर कार्यरत बारह पुलिस कर्मियों के नाम की सूची संघ लोक सेवा आयोग को भेजी थी। जिसके बाद लोक सेवा आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उन बारह नामों में से तीन नामों का चयन किया था। इसके बाद बिहार सरकार को इन नामों में से डीजीपी के चुनाव की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। जिसमें नीतीश कुमार के करीबी कहे जानेवाले एवम् धर्म और अध्यात्म में रुचि रखने वाले गुप्तेश्वर पांडेय को बिहार का डीजीपी नियुक्त किया गया।
    गुप्तेश्वर पांडेय ऐसे वक्त में डीजीपी बनाए गए जब बिहार में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा था और पुलिस लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखने में असफल साबित हो रही थी। हालाँकि लालू यादव के समय के तुलना में अपराध कम तो हुए पर यह अभी भी नहीं कहा जा सकता है कि ‘राज्य में कानून का राज है।”

    Gupteshwar Pandey hd pic
    Image taken from the wall of Gupteshwar Pandey.
  • कैसा है इनका करिअर हिस्ट्री शीट? 
    गुप्तेश्वर पांडेय सांप्रदायिक हिंसा एवम् अपराधों को रोकने के लिए जाने जाते हैं। औरंगाबाद में धार्मिक कारणों से हुई हिंसा के तनाव को कम करने के लिए इन्हें ही भेजा गया और ये सफल भी हुए । इसके पहले भी कई बार वे स्थिति संभाल चुके हैं।
    गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के डीजीपी से पूर्व, ASPS,SP , DIG , IGD के रूप में बिहार के 26 जिलों में कार्य कर चुके हैं । इस दौरान वे 1993 में बेगूसराय और 1996 में बिहार के जहानाबाद में अपराध को रोकने के लिए की गई बड़ी कार्रवाई के लिए भी जाने जाते हैं। इन्होंने मोतिहारी, सुगौली, रामगढ़वा वैशाली और दरभंगा में उत्पन्न हुए सांप्रदायिक तनाव पर भी काबू किया था ।
    गुप्तेश्वर पांडेय को सांप्रदायिक हिंसा एवम् अपराध को रोकने में मंझा हुआ माना जाता है ।
    गुप्तेश्वर पांडेय ने डीजीपी बनने के बाद कहा था कि वे जनता की मदद के बल पर अच्छा काम करेंगे और सरकार की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का प्रयास करेंगे। इनके आने के बाद ही पुलिस और जनता के बीच दूरी कम हुई एवम् इन्होंने पुलिस को पीपल फ्रेंडली बनाने की पहल की। इनका कहना है कि पुलिस लोगों से आदरपूर्वक बर्ताव करेगी और शोषितों की मदद करेगी। हालाँकि अक्सर सोशल मीडिया पर बिहार पुलिस के जनता को गाली गलौज, FIR करने में देरी आदि जैसी घटनायें आती रहतीं हैं जो उनके वादों को खोखला साबित करती हैं।
  • इनकी सामाजिक छवि :

यह भी सच है कि गुप्तेश्वर पांडेय अक्सर लोगों से मिलते एवम् उनके घर खाना खाते नजर आते हैं। कुछ दिन पहले ही डीजीपी सड़क पर कमर में गमछा बांधे घूमते रहे और किसी को उनके ओहदे का पता तक नहीं चल पाया। इस दौरान उन्होंने बाइक सवारों के मास्क एवम् हेलमेट की जांच भी की। इसके बाद वे एक गांव में जा पहुंचे जहां उन्होंने नाश्ता मांगा, जहां उन्हें नमक , रोटी और मिर्च मिली जिसे उन्होंने बड़े चाव से खाया। वे सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों से जुड़े रहते हैं।

Gupteshwar Pandey hd pic
Image taken from the wall of Gupteshwar Pandey.

बता दें कि गुप्तेश्वर पांडेय अपने इसी अंदाज के लिए जाने जाते हैं।सोशल मीडिया पर लाखों की संख्या में उनके फॉलोवरस् हैं और अक्सर वे लाइव आकर जनता से बातें करते हैं। अक्सर जनता उन्हें सोशल मीडिया पर टैग कर अपनी बातें भी रखती हैं। उन्हें अक्सर पुलिस कर्मियों का हौसलाअफजाई करते हुए देखा जा सकता है। अब यह देखना काफ़ी दिलचस्प होगा कि वे राजनीति में कब किस पार्टी के साथ और कितने सक्रिय होतें हैं।

By, Pratiksha Kumari

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