सुनंदा पुष्कर मामले में रिपब्लिक के अर्नब पर कोर्ट की तीखी प्रक्रिया, ये है पूरा मामला

कांग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर केस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने से समानांतर जांच चलाने पर सवाल किया।

गुरुवार को कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को उनकी भाषा पर नियंत्रण रखने को कहा। बता दें की यह कोई पहले बार नहीं है जब कोर्ट ने सुनंदा पुष्कर केस के मामले सलाह व निर्देश दिया है। 2017 में , शशि थरूर ने अर्नब गोस्वामी पर 2 करोड़ रुपए का मानहानि केस दर्ज कराया था। इस पर अर्नब के वकील ने मामले को संभालते हुए कहा कि वो अर्नब को रोकेंगे।

हालांकि मामला अर्नब के मीडिया ट्रायल चलाने का है। अर्नब गोस्वामी के दो टीवी नेटवर्क हैं, रिपब्लिक टीवी जो एक अंग्रेजी न्यूज चैनल है- और रिपब्लिक भारत जो की एक हिंदी न्यूज चैनल है। अर्नब किसी भी जाने माने न्यूज के मीडिया ट्रायल और अपने खोजी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने सुनंदा पुष्कर की मौत के बाद जो की पहले आत्महत्या बताया जा रहा था यानी 2014 के बाद इस केस पर भी मीडिया ट्रायल किया और उन्होंने अपने पास सबूत होने का दावा किया। उन्होंने शशि थरूर को आरोपी भी बताया। जिसपर शशि थरूर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ऐसे आरोपों पर आपत्ति जताई। जिसके बाद अर्नब को कोर्ट से चेतावनी मिली थी।

जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने कहा कि कोई प्रेस को रोक नहीं रहा है और नहीं रोक सकता है, बल्कि जांच कि शुद्धता के लिए ऐसे निर्देश दिए जा रहे हैं। कोर्ट जस्टिस ने पत्रकारों को पहले क्रिमिनल ट्रायल का कोर्स करने की सलाह दी और बाद में पत्रकारिता में ऐसे न्यूज का ट्रायल करने को कहा। उन्होंने 2017 के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस के जांच के साथ मीडिया समानांतर जांच नहीं कर सकती है। प्रेस किसी को दोषी करार नहीं दे सकती है, न हीं दोष को साबित करने पर जोर दे सकती हैं।

अर्नब के पास सबूत होने पर कोर्ट ने कहा कि इस बात का फैसला कोर्ट करेगी क्या सबूत है और क्या नहीं क्योंकि क्रिमिनल ट्रायल में कई बयान सबूत नहीं होते हैं और रिपब्लिक टीवी के चीफ एंड एडिटर अर्नब गोस्वामी को इस मामल में संयम रखने को कहा।

By, Ritu Kumari

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