राजस्थान की बदलती सियासत, क्या गहलोत की गुगली के आगे टिक पाएंगे पायलट?

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देश की सबसे पुरानी पार्टी जिसका एक समय देश के लगभग सभी राज्यों में बहुमत हुआ करता था। आज वही कांग्रेस सभी जगह से बिखरते नजर आ रही है। कर्नाटक, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस अपनी सत्ता गंवा चुकी है। सियासत में जारी उठापटक के बिच फिलहाल कांग्रेस राजस्थान की जमीन बचाने में लगी है। इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बयान साझा करते हुए कहा कि पार्टी के लोग ही पार्टी को तोड़ने में लगे हैं। उन्होंने युवा नेता सचिन पायलट को भाजपा के हाथ बिक जाने की बात कही है। कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री तथा राजस्थान पार्टी अध्यक्ष के पद से बर्खास्त कर दिया है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि 2018 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस की जीत के असली कर्णधार सचिन पायलट ही थे। यह बात अलग हैं कि हर 5 वर्ष में राजस्थान की जनता सरकार बदलने का फैसला सुनाती हो, लेकिन इस बार पायलट के चेहरे के बदौलत ही कांग्रेस वापस सत्ता में आई थी। तब अशोक गहलोत राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय थे। ऐसे में राजस्थान कांग्रेस का मुख्यमंत्री पायलट को देखा जा रहा था। परंतु आलाकमान ने सरकार चलाने की जिम्मेदारी अशोक गहलोत को सौंप दी और पायलट उप मुख्यमंत्री के पद से ही खुश होना पड़ा।

सचिन पायलट जो पार्टी के सबसे चहेते चेहरे माने जाते हैं। युवा, सौम्य और शानदार वक्ता के रूप में उन्होंने अपनी छवि बना लिया था। लेकिन सियासत के माहिर खिलाड़ी अशोक गहलोत के अनुभव और पार्टी के प्रति पुरानी वफादारी के सामने सचिन पायलट को सीमित दायरे में रहना पड़ा। यह कयास लगाया जा रहा था कि राजस्थान की सियासत इन दोनों नेताओं की आपसी खींचतान से अछूती नहीं रह पाएगी। करीब डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद भी वही हुआ।

हाल ही में राज्यसभा के लिए चुनाव सम्पन्न कराए गए। राजस्थान के 3 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा ने अपनी दावेदारी के लिए उम्मीदवार उतारा। खैर,कांग्रेस विधायक दल की संख्या ज्यादा होने के कारण यह स्पष्ट कहा जा सकता था कि राज्यसभा की ज्यादा सीटें कांग्रेस के हाथ आने वाली थी । इस बीच कांग्रेस में फूट आना और सरकार तोड़ने की साजिश को देखते हुए कांग्रेस के सीनियर नेता व प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कान्फ्रेंस में साफ साफ कहा कि भाजपा खरीद-फरोख्त की नीति पर चल रही हैं। भाजपा ने हमारे विधायकों को खरीदने की कोशिश की ताकि राज्यस्थान की सियासत ए सरताज़ अपने हाथ कर सकें।

सूबे की सियासत के इस खींचतान में कांग्रेस ने आखिर फिर से बहुमत साबित करने की बात कही हैं। अन्य दो नेता जिसमें कैबिनेट के मंत्री विश्वेंद्र सिंह एवं विधायक भवरलाल शर्मा को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया। यह कयास लगाया जा रहा था कि पायलट के साथ अन्य 30 विधायकों का समर्थन हैं। पर इस बात को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने आवास पर सभी 107 विधायकों का परेड करा कर यह साबित कर दिया कि राजस्थान की सरकार पूर्ण बहुमत में हैं |

खैर अब सिर्फ इंतजार किया जा सकता हैं कि आगे की राजनीति और रणनीति किसके पक्ष में होती हैं।

 

Reported by: Abhay Kumar Singh

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