पटना में एक गार्ड कर रहा था कुतिया का रेप, युवाओं ने वीडियो बना अपराधी को जेल पहुँचाया

जानवरों के साथ हो रहे बर्बरता की एक घटना बीते रविवार यानी 1 नवंबर को एक वीडियो में देखा गया। मामला बिहार की राजधानी पटना के बुद्धा मार्ग का है जहां एक व्यक्ति पिछले कई दिनों से एक बेजुबानँ गर्भवती कुतिया के साथ दुष्कर्म कर रहा था। इस मामले कि जानकारी इंस्टाग्राम  पर अपलोड किए गए एक वीडियो से सामने आयी,जिसकी जानकारी एक  ऐनिमल ऐक्टिविस्ट प्रियंका ने पटना के भूरी फाउंडेशन को दी। यह फाउंडेशन जानवरों के लिए काम करती है।

पटना के कुछ युवाओं द्वारा संचालित इस संगठन कि शुरुआत 3 साल पहले पटना में निधि ने किया लेकिन आज उनके साथ बहुत लोग जुड़ चुके हैं, जो पूरे पटना में जानवरों कि सुरक्षा और उनके रेस्क्यू का काम करते हैं। इस फाउंडेशन की संचालिका निधि ने बताया कि, उन्होंने ने जब उस बेज़ुबा (जिसका नाम निधि ने शिरो बताया) का एक्सटर्नल जेंनिटेलिया टेस्ट कराया तब उसके वजाईना से इंसानी सेमन यानी स्पर्म पाया गया। भूरी फाउंडेशन इस मामले की जांच के लिए कोतवाली पुलिस गई , अतः स्थानीय पुलिस का सहारा लिया। फाउंडेशन की संचालिका निधि ने बताया कि पहले तो पुलिस इस केस को लेने के लिए तैयार नहीं थी पर अब पुलिस के द्वारा बहुत मदद मिल रही है।

Bhoori foundation patna
गिरफ्त में अपराधी/ तस्वीर साभार : भूरी फाउंडेशन सोशल मिडिया

अपराधी गिरफ्त में:

अपराधी पटना के एक अपारटमेंट का चौकीदार बताया जा रहा है, उसे पुलिस ने अब गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस मामले को धारा 377 के अतंर्गत दर्ज किया है।
भूरी फाउंडेशन के अनुसार शिरो की हालत अब ठीक है लेकिन वह अब इंसानों से डर रही है खासकर पुरूषों से।
उन्होंने यह भी बताया कि इस केस में उनकी मदद PETA फाउंडेशन ने भी की।
सोशल मीडिया पर इस मामले की कड़ी निंदा की जा रही है और लोग भूरी फाउंडेशन को भी धन्यवाद दे रहे हैं। इस केस से जुड़ा पुरा वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक पर है जहां पर लोग देख रहे है और शेयर भी कर रहे है।निधि ने अपने सोशल मीडिया पर लिख कर सभी साथियों, आर जे विशा और ऐनिमल लिब्रेशन को धन्यवाद दिया।

लिखित में दर्ज शिकायत

क्या है धारा 377? 

  • धारा 377 के के तहत जो भी अपनी मर्जी से किसी पुरुष, महिला या जानवर के साथ प्राकृतिक नियमों के खिलाफ जाकर शारीरिक संबंध बनाएगा उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी।
  • इस कानून के तहत समलैंगिकता को भी अपराध माना जाता था परन्तु 6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को वैध करार दिया।

 भारत के संविधान में जानवरों से जुड़े क्या कानून हैं?

  1. प्रिवेंशन ऑफ क्रूशियल एनिमल एक्ट 1960 की धारा 11(1); इसके अंतर्गत पालतू जानवर को छोड़ने, उसे भूखा रखने, कष्ट पहुंचाने, भूख और प्यास से जानवर के मरने पर आपके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है। इसके लिए 50 रुपए का जुर्माना हो सकता है। अगर तीन महीने के अंदर दूसरी बार जानवर के साथ ऐसा हुआ तो 25 से 100 रुपए जुर्माने के साथ 3 माह की जेल सकती है।              हालाँकि इस कानून को सख़्त बनाने कि बहुत आवश्यकता है और कानून में ऐसे प्रावधान लाने की जरूरत है जिसे जानवरों के प्रति किए जाने वाले अपराधों में तेज़ी से कमी आए।
  2. धारा 428 और 429: इसके तहत किसी ने जानवर को जहर दिया, जान से मारा, कष्ट दिया तो उसे दो साल तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही कुछ जुर्माने का भी प्रावधान है।
  3. भारत सरकार के एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल (2001):इस रूल के अनुसार किसी भी कुत्ते को एक स्थान से भगाकर दूसरे स्थान में नहीं भेजा जा सकता। अगर कुत्ता विषैला है और काटने का भय है तो आप पशु कल्याण संगठन में संपर्क कर सकते हैं।
  4. भारत सरकार के एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल (2001) की धारा 38 के अनुसार किसी पालतू कुत्ते को स्थानांतरित करने के लिए चाहिए कि उसकी उम्र 4 माह पूरी हो चुकी हो। इसके पहले उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना अपराध है।
  5. जानवरों को लंबे समय तक लोहे की सांकर या फिर भारी रस्सी से बांधकर रखना अपराध की श्रेणी में आता है। अगर आप जानवर को घर के बाहर नहीं निकालते तो यह भी कैद माना जाता है। ऐसे अपराध में 3 माह की जेल और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  6. प्रिवेंशन ऑन क्रूशियल एनिमल एक्ट 1960 की धारा 11(1):इस एक्ट के तहत अगर किसी गोशाला, कांजीहाउस, किसी के घर में जानवर या उसके बच्चे को खाना और पानी नहीं दिया जा रहा तो यह अपराध है। ऐसे में 100 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है।
  7. मंदिरों और सड़कों जैसे स्थानों पर जानवरों को मारना अवैध है। पशु बलिदान रोकने की जिम्मेदारी स्थानीय नगर निगम की है। पशुधन अधिनियम, 1960, वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत ऐसे करना अपराध है।
  8. किसी भी जानवर को परेशान करना, छेड़ना, चोट पहुंचाना, उसकी जिंदगी में व्यवधान उत्पन्न करना अपराध है। ऐसा करने पर 25 हजार रुपए जुर्माना और 3 साल की सजा हो सकती है।

इन कानूनों के बावजूद भी सरकारें जानवरों को सुरक्षा देने में असमर्थ हैं। बता दे कुछ समय पहले बिहार सरकार ने नीलगायों कि संख्या बढ़ने कि वजह से उन्हें मारने के आदेश दे डाले। किसानों के फसलों को बचाने का ऐसा समाधान कहाँ तक उचित है आप हमें tgidesk@gmail.com पर लिखें । हम उसे प्रकाशित करेंगे।

– शुभम कुमार द्वारा निर्देशित, ऋतु कुमारी की रिपोर्ट 

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