हर साल के तरह इस साल भी उड़े नीतीश कुमार, लिया बाढ़ का जायजा

आज पूरे उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। लगातार हो रही बारिश के पानी के कारण नेपाल के तराई हिस्से में जल जमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नेपाल के प्रमुख नदियों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसका खामियाजा उत्तर बिहार के तमाम जिलों को डूब कर चुकाना पड़ रहा है।

एक ओर कोरोना जैसी महामारी का सामना कर रहे बिहार में झुग्गियों में रहने वाले लोग अब बाढ़ के कारण अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हवाई सर्वेक्षण के जरिए लोगों का हाल जानने निकले। दरभंगा पहुंचकर बाढ़ के लिए जा रहे राहत शिविर का जायजा लिए।

पर सवाल उठता है कि “क्या नीतीश सरकार को 15 साल के कार्यकाल में भी इसका उपाय नहीं मिला?” बेशक उपाय तो बहुत हैं पर राजनैतिक इक्षा शक्ति लेश मात्र भी नहीं, और अगर होती तो दशकों से बाढ़ नियत्रण प्रणाली शून्य नहीं रहती।लोगों की मानें तो बेशक बिहार में बिजली, सड़क और कानून व्यवस्था में थोड़ी बदलाव आयी है पर, शिक्षा, स्वस्थ और बाढ़ अभी भी बिहार सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 

यह स्पष्ट है कि प्रत्येक वर्ष बिहार में बाढ़ का आना आम बात हो चला है। घर बर्बाद होते हैं, कई लोग बाढ़ के पानी से अपनी जान भी गंवा देते हैं और सरकार इस दरमियां राहत सामग्री का बंदोबस्त भी कर देती है। पर क्या सिर्फ समाग्री का बंदोबस्त कर देना बाढ़ की स्थिति से उभार सकता है?

सभी नदियों पर बांध की स्थिति दयनीय है। नदियों का गर्भ स्थल भर चुका है। एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार को चाहिए कि गर्भ स्थल को गहरा करवाये। एक मजबूत बांध व्यवस्था को तैयार किया जाए ताकि जल ग्रामीण क्षेत्रों में ना जा सके और व्यवस्थित रूप से कैनाल सिस्टम बनवाया जाए ताकि सूखा प्रभावित इलाकों में इस पानी का उपयोग हो सके। हर साल बाढ़ आती है, राहत कार्य के लिए फंड भेजा जाता है और प्रभावित जनता बस समय काटने के अलावा कुछ उम्मीद भी नहीं कर सकती। 

गौरतलब है कि इस साल अभी तक बिहार के 11 जिलों की 25 लाख आबादी बाढ़ से जूझ रही है। सूबे में 11 जिले के 101 प्रखंड की 837 पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। 22997 लोग अपने घर को छोड़कर राहत शिविर में ठहरे हुए हैं। कई लोग दूसरे जिलों में पलायन कर रहे हैं।

By, Abhay Kumar Singh 

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